Wednesday, 29 March 2017

मनोज कुमार झा : हर भाषा में जीवित-मृत असंख्य लोगों की सांस बसती है



मनोज उन थोड़े कवियों में से हैं जो लिखते हैं तो अपनी भाषा से भाषा के बाकी पथों को तोड़ते हुए चलते हैं. उन थोड़े लोगों में से भी हैं जो rigorously पढ़ते हैं और पाश्चात्य चिंतकों और दर्शन पर उनकी कमाल  की पकड़ है.



1. कविता क्या है आपके हिसाब से?क्यों लिखनी शुरू की?
    हमलोग बातचीत शुरू करें इससे पहले मैं उद्धरण उदृत करना चाहूँगा heraclitus को , जो कहते हैं, कि Let us not conjecture at random about great things. कविता क्या है , इसको कई लोगों ने कई तरह से कहा है , मैं अभी तक उस स्थिति तक नहीं पहुंचा हूँ जहाँ आके पूरे जोर से कह सकूं की कविता क्या है, हाँ यह जरुर बता सकता हूँ की कविता क्या नहीं है . कोई कविता देखूं तो कह सकूं की यह कविता नहीं है,  क्यों नहीं है . चूँकि मैं दूसरा काम मैं जानता नहीं था , खेल में कमजोर था , पढने में ठीक ठाक था, कविता लिखने लगा. 

2. पठन का रचना में क्या योगदान है, आपको क्या लगता है?
    बहुत योगदान है , दृष्टि देता है , पता चलता है कि  आपकी परम्परा में क्या कुछ हो चुका है और आप कहाँ हैं.चीज़ें इतनी जटिल होती गई हैं कि सिर्फ common sense से कवि का काम नही चलेगा।

3. पहली पढ़ी हुई कविता कौन सी याद आती है? प्रिय कविता कौन सी है ? प्रिय कवि कौन हैं?
    भवानी प्रसाद मिश्र  की सतपुड़ा के घने जंगल . प्रिय कवि कौन हैं यह कहना मुश्किल है क्योंकि लम्बी परम्परा है हिंदी कविता की लेकिन हिंदी कविता में सबसे प्रिय निराला . जिन प्रणम्य कवियों के साथ हम लोगो को लिखने का सुख और सौभाग्य हासिल है,उनमे सबसे प्रिय अरुण कमल हैं।

4. कविता का रोल क्या है - समाज के सन्दर्भ में, या अन्य कोई सन्दर्भ आपके हिसाब से? क्या उसकी प्रासंगिकता जिंदा है अभी भी?
     हाँ बिलकुल जिंदा है , कविता जो इतने दिन लिखी गयी , कविता नाम की चीज़ ने समाज में शक्ति अर्जित कर ली है . कविता का या इन जेनरल साहित्य का रोल क्या है यह हमेशा सतह पर नही रहता।कभी आप आधी रात बडी बेचैनी ,बड़ी निर्थकता महसूस करते हैं कि तभी कोई एक पंक्ति ज़ेहन में आती है और आपको बचा ले जाती है।
Einstien ने the brother Karamazov उपन्यास को अपने किये गए काम से बड़ा माना था।जबकि हम सब जानते हैं कि उन्होंने विज्ञानं का paradigm ही बदल डाला, उनका डंका मूर्खो में भी बजता है।
तो बड़े आड़े-तिरछे ढन्ग से साहित्य काम करता है. फिर इतने महान लोगों द्वारा लिखी जाकर कविता ने एक शक्ति भी हासिल कर ली है,इसका भी उपयोग होता है।

5. क्या पढना है इसका चयन करने का आपका क्या तरीका है?
    यह तरीका बदलता गया . शुरू में किसी के नाम सुन के , सलाह से , चर्चा से किताब पढ़ता था .  अब तो है साल में दो तीन चिंतकों को पढ़ता हूँ , उनकी सारी किताबें पढ़ ली .वह भी सारा का सारा नहीं पढ़ता , जहाँ से मन हुआ वही से पढ़ लिया . कविता में होने का सबसे बड़ा सुख यही है , अगर में सोशियोलॉजी में होता या पॉलिटिकल साइंस में होता तो मुझे एक नियम के साथ पढ़ना पढ़ता , लेकिन यहाँ फ्रीडम मिलता है पढने का .

6. लिखते हुए शिल्प कितना महत्वपूर्ण होता है?
   बहुत होता है ।कथ्य की तरह इसकी व्याप्ति भी पूरी कविता में होती है.

7. कविता से चरम महत्वाकांक्षा क्या है - प्रसिद्धि , पैसा, अमरता - कवि आखिर में क्या चाहता है?
    हिंदी में कवि को प्रसिद्धी तो मिलती नहीं , मोहल्ले का आदमी तक नहीं जानता और पैसा तो थोडा ही चाहिए होता है जिससे जीवन यापन हो जाये और अमरता तो किसी चीज़  में होती नहीं क्योंकि दुनिया को भी एक दिन नष्ट हो जाना है.पैसा को लेकर Oscar wild का कथन सर्वाधिक उपयुक्त है की गरीबी नष्ट करती है,अमीरी और ज़्यादा नष्ट करती है

8. नए लिखने वालों के लिए क्या सलाह देंगे?
     खूब पढ़े,अपने परम्परा को जाने, जितना पढ़ सकते हैं उतना पढ़े तब लिखे.परंपरा का मतलब मंनुष्य होने की तहदार परंपरा,फिर विश्वसाहित्य की परंपरा,फिर अपनी हिंदी की परंपरा,फिर जो चीज़ें परम्परा में अँत नही पायी उनकी परम्परा।एक बात जरूर कहूंगा कि कोई मौज-मस्ती के लिए कविता लिखता है तो उनसे कविता नही सकती,कविता की भूमि तोखाला का घर तो बिलकुल नही है और भाषा के प्रति गम्भीर हों,हर भाषा में जीवित-मृत असंख्य लोगों की सांस बसती है।

9. इधर क्या पढ़ रहे हैं और कौन सी किताबें आपको लगता है कि हर किसी को पढनी चाहिए?
    इधर में zizek और deleueze को पढ़ रहा हूँ पिछले डेढ़ साल से,साथ ही निराला का गद्य भी . यह मैं नहीं कह सकता की कौन सी किताबें अच्छी हैं , खुद कवि को चुनना चाहिए की कौन सी किताबें पढ़ें , जो सामान्य युवा कवि समुदाय है उनको नहीं बता सकता सबकी अपनी रुचियाँ होंगी सब अपने रूचि से पढ़ें.  


(कवि  से बात की अंचित और सुधाकर ने)

No comments:

Post a Comment