रोमियो ओ रोमियो


                       यूपी में जो एंटी रोमियों स्क्वाड बना है, उस से मुझे अपने बचपन के दिनों पर अतिरेक हर्ष हो रहा है. हर्ष का दूसरा विषय ये है कि मैं बिहार में हूँ, जो यूपी के पास है पर यूपी नहीं है. थोडा मुझे नीति- निर्धारण करने वालों की सोच पर भी हर्ष हो रहा है कि वो किस गफलत में क्या कर बैठे हैं. बचपन से जो मुझे प्रेम का अनुभव रहा है और जिस प्रकार तथाकथित मनचले रगेदे जा रहे हैं, मुझे यूपी वाली पुलिस पर भी अफ़सोस हो रहा है.  वो प्रेमियों की मनोस्थिति और प्रेमिकाओं की गुंडागर्दी समझने में असफल रहे हैं. इस से यही निष्कर्ष निकलता है कि हो सकता है एंटी रोमियो स्क्वाड वाले या तो एकतरफ़ा प्यार वाले रहे होंगे या भगवान ने उन्हें भाग्यशाली समझा होगा इसीलिए उनके पैसे और ह्रदय का ख्याल करते हुए उनके जीवन में प्यार का प्रवेश कराया ही नहीं होगा.  दो तीन परिस्थितियों पर ध्यान देना आवश्यक है. पहले तो भारत में प्रेम का व्यवहारिक पक्ष समझा जाए. 
१. अगर लड़के को प्रेम हो गया और लड़की ने दुर्भाग्यवश उसे स्वीकार कर लिया तो फिर लड़का सुधर ही जाता है. वो मनचला नहीं रह पाता. लड़की छेड़ना, कमेंट करना तो दूर है. उसकी आँख गलती से उस दिशा में मुड़ भी गयी जिधर कोई और लड़की हो, तो प्रेमिका को दूर से भी इंट्यूशन हो जाती है. अगर पता ना भी चले तो ऐहतियातन, हर दूसरे दिन प्रेमिकाएं प्रेमियों की कुंडली में राहू केतु प्रवेश करा ही देती हैं. तो पार्क हो या सोशल मीडिया, लड़का गालियाँ और बदतमीज़ी का प्रयोग तभी करता है जब वो निरा मूढ़ हो या कोई उसकी देशभक्ति को चुनौती दे दे. 
२. मित्रों, नौकरियां तो गुज़रे ज़माने की बात हो गयी हैं. चचा गमे इश्क को गमे रोज़गार से पहले रखते हैं पर भारत में लड़के के बाप की लिस्ट में रोज़गार के अलावा कुछ नहीं दिखता. और कम नौकरियां हो तो बाप की मार में बढ़ोतरी और मित्रों को संख्या में कमी आ जाती है. नौकरी नहीं होती तो पैसे नहीं होते. भारत में तो प्रेम की खरीद फरोख्त होती है. इधर से पैसे नहीं तो उधर से पैसे नही. एंटी रोमियो स्क्वाड की क्या ज़रूरत. हम लोगों ने सामाजिक तौर पर प्रेम की माँ बहन और बाप भाई सब किया हुआ है. 
३. भाई की भी ज़रूरत यही बड़के भैया पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं. एक लड़की के भाई ने मुझसे मिलने की शर्त रखी. प्रेमिका से मैंने कहा- जहाँ मिलना है बुलाले. मैं निहत्था और अकेला आऊंगा. भाई ने फिर अपने ईगो का हवाला दिया या मुझे बच्चा समझते हुए छोड़ दिया ये वो जाने पर मिला नहीं. ये जो मोरल पुलिसिंग में लगे हैं, ये यही दग्ध भाइयों की बिग्रेड है. महिला अपराध तो घंटा कम हो रहे हैं, राखी का खर्चा खामखाह बढ़ता जा रहा है. 
                           जो प्रेमिका आते ही घर जाने की जिद लगा बैठती है, उसे घर भेजने से क्या होगा. जो लड़का पूरे दिन प्रेमिका का सामान उठाये कसरत करता रहता है, उसके लिए चार उठक बैठक क्या है. जो सबसे शोषित वर्ग है समाज का उसी के पीछे हाथ धोके पढ़ गये हो.एक चर्चा नाम की भी हो रही है. भाई रोमियो सोलह साल का नौजवान आशिक था. तेरह साल की जूलियट से आज प्यार हुआ,कल रोमांस किया और परसों दोनों गलतफहमी में चल बसे. रोमियो के खिलाफ होना तो प्यार के खिलाफ होना हुआ. ऊपर से इटालियन . मुझे पक्का यकीन है कि रोमियो को गोमांस से कोई परहेज नहीं था. इंडिया को आर्यावर्त कहने वाले रोमियो का नाम क्यों रखें, अपने यहाँ तो प्यार करने वाले सदाबहार भगवान यूपी से आते हैं, उनके बारे में सोचते, उनकी शिक्षा के बारे में सोचते, खैर इतना सोचते तो फिर प्यार के बारे में सोचते.  लड़कियां प्यार करें तो उनका चरित्र गलत होता है- ये नैरेटिव तो नमक मिर्च के साथ ठेल ही रहे थे, हे समानता के चौकीदारों, पब्लिक प्लेसेस पर प्रेमिका से सार्वजनिक स्थानों पर अकारण पिटने वालों को भी तुमने अपने राडार पर ले लिया. नौजवान प्रेम नहीं करेगा तो लव जिहाद और घर वापसी का क्या होगा - तुम दंगे कैसे करोगे? 
छेड़खानी तो पार्कों में साथ बैठ के लड़का लड़की करते नहीं. और अधिकतर छेड़खानी जैसे मैंने देखा है,होने के बावजूद, कोई कुछ नहीं करता. महिला पुलिस उसके लिए पहले रखी हुई थी. क्रिमिनल के सामने लाठी चलेगी नहीं तो जो लड़का पहले से दुखी है कि उसके जेब में पैसे नहीं है, जो प्रेमिका पहले से दुखी है कि उसका बॉयफ्रेंड इतना निक्कमा है कि पल्सर चलता है और बुलेट नहीं, उसको काहे और त्रस्त करते हो. 
अब तो वो मटन बिरियानी भी नहीं खा सकते. आखिर भारतीय ब्रह्मचर्य परिषद् का सदस्य अगर सब बन गये तो हिन्दू जनसँख्या का क्या होगा. एक विराट हिन्दू ब्राह्मण दुःख से ये प्रश्न करता है. पहले ही डॉक्टर और इंजिनियर लोगों ने हम लेखकों की कुंडली पर ग्रहण लगाया हुआ है. बनारस जा कर एक विदेशी से प्रेम करते हुए अमेरिका जाने का जो सपना इस ब्राह्मण ने देखा हुआ था उसको इसबगोल की भुस्सी के साथ क्यों पीने पर विवश कर रहे हैं. 

जनता खाक विरोध करे. फासीवाद और जहानाबाद के बीच में अंतर बुझती नहीं और जो तनिक समझदार हैं उनको तो विकास दिखिए जाता है. ऊपर से इतना अजेंडा थोप रहे हैं, पूजा पाठ का कोर्स शुरू करा के कैंपस शुरू करा दीजिये, लड़का सब प्रेमिका को भूल जायेगा. नहीं तो प्रेमी के यहाँ लड़की जाती है तो सास ससुर का सम्मान करती है, लड़का अपने सास ससुर की कदर करता है. न दहेज़ मांगता है, न लड़की सास के कलेजा पर कत्थक करती है. ये सब परम्परा का ह्रास ठीक थोड़े है. ऐसे थोड़े भारत अपने अतीत वाले चरम पर पहुचेगा.

सोचियेगा हो, इस स्क्वाड का कोई फायदा नहीं हो रहा है. जिसको प्यार करना है वो प्यार करने के तरीके खोज ही लेगा. जिसको विरोध करना है वो विरोध कर ही लेगा. अगर बिना प्यार का समाज चाहिए. लड़की को दबा के रखना है अंगूठा से और मर्द को मर्द बनाये रखना है. रोमियो कहा के हीरो खुश ही होगा और लड़की और जुलिअट बनने की कोशिश ही करेगी. बाकी जब अकेले जाने और वो भी निहत्थे जाने का हिम्मत प्यार में मिल ही जाता है तो वो लोग तो समझ ही लेंगे. एक थो कह रहा था कि इतिहास में जितना प्रेमी हुआ सब, वही सब फेमस है, रोकने वाला सब विलेन गिना जाता है. आदिगुरू के साथ इस व्यवहार के बारे में सोच कर कलेजा टूट रहा है. 

-अंचित

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